हंसध्वनी Raagparichay Thu, 07/07/2022 - 14:10 यह राग कर्नाटक संगीत पद्धति से हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति में सम्मिलित किया गया है। यह राग, राग शंकरा के करीब का राग है, पर इसमें धैवत वर्ज्य है। राग हंसध्वनि में नि प सा' नि ; प नि प ग ; ग प ग रे सा लिया जाता है और राग शंकरा में नि ध सा' नि ; प ध प ग ; ग प रे ग रे सा ; लिया जाता है। यह स्वर संगतियाँ राग हंसध्वनि का रूप दर्शाती हैं - ,नि रे ग सा ; ग प ग ; रे प ग ; नि प ग रे ; ग रे ग रे सा ; ,नि ,प ,नि रे ,नि ,प सा; थाट बिलावल " class="video-embed-field-lazy"> राग जाति औडव - औडव गायन वादन समय रात्रि का द्वितीय प्रहर ७ बजे से १० बजे तक आरोह अवरोह सा रे ग प नि सा' - सा' नि प ग रे सा ,नि ,प ,नि रे सा ; वादी स्वर षड्ज/पंचम संवादी स्वर षड्ज/पंचम Tags राग परिचय राग शंकरा परिचय राग और थाट में अंतर रागों के प्रकार संगीतातील राग कोणते शास्त्रीय संगीत राग राग की जाति मारवा थाट के राग राग हंसध्वनी Log in to post comments 1719 views ...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें